नमस्कार
आज मैं आपको बता रहा हूँ कि किस प्रकार आपकी कुंडली में स्थित कोई उच्च ग्रह आपको हानि दे सकता है और कोई नीच ग्रह आपको लाभ दे सकता है।
जैसा कि जब कोई ग्रह उच्च / नीच का होता है तो वो उस स्थान से सातवें स्थान पर नीच/उच्च दृष्टि डालता है। इसका तात्पर्य ये हुआ कि यदि कोई ग्रह उच्च का है तो वो अपने से सातवें भाव (स्थान/घर) का अशुभ प्रभाव डालेगा। और यदि ग्रह नीच का है तो वो अपने से सातवें भाव पर शुभ प्रभाब डालेगा।
इस प्रकार किसी व्यक्ति की कुंडली में तीसरे, चौथे, पांचवे या आठवें घर में नीच ग्रह स्थित हो, तो ये नीच ग्रह व्यक्ति को लाभ ही देगा। क्योंकि इन स्थानों पर स्थित ग्रह की सातवीं दृष्टि नवम,दशम,एकादश और द्वितीय स्थान पर उच्च की होने से जो कि क्रमशः भाग्य ,सम्मान-उन्नति, लाभ तथा धन का विशेष लाभ का योग बनाता है।
लेकिन इस प्रकार के योग में मनुष्य को व्यक्तिगत,पारिवारिक, आंतरिक समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है।
आज मैं आपको बता रहा हूँ कि किस प्रकार आपकी कुंडली में स्थित कोई उच्च ग्रह आपको हानि दे सकता है और कोई नीच ग्रह आपको लाभ दे सकता है।
जैसा कि जब कोई ग्रह उच्च / नीच का होता है तो वो उस स्थान से सातवें स्थान पर नीच/उच्च दृष्टि डालता है। इसका तात्पर्य ये हुआ कि यदि कोई ग्रह उच्च का है तो वो अपने से सातवें भाव (स्थान/घर) का अशुभ प्रभाव डालेगा। और यदि ग्रह नीच का है तो वो अपने से सातवें भाव पर शुभ प्रभाब डालेगा।
इस प्रकार किसी व्यक्ति की कुंडली में तीसरे, चौथे, पांचवे या आठवें घर में नीच ग्रह स्थित हो, तो ये नीच ग्रह व्यक्ति को लाभ ही देगा। क्योंकि इन स्थानों पर स्थित ग्रह की सातवीं दृष्टि नवम,दशम,एकादश और द्वितीय स्थान पर उच्च की होने से जो कि क्रमशः भाग्य ,सम्मान-उन्नति, लाभ तथा धन का विशेष लाभ का योग बनाता है।
लेकिन इस प्रकार के योग में मनुष्य को व्यक्तिगत,पारिवारिक, आंतरिक समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है।
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