Wednesday, 21 December 2016

क्या आपकी कुंडली में प्रेम विवाह के योग के हैं!!

जानिये क्या आपकी कुंडली में प्रेम विवाह के योग के हैं!!
यदि आप किसी युवक या युवती से प्रेम करते हैं और उसी से विवाह करना चाहते हैं ।
परंतु विवाह में अडचने आ रही हैं तो जान लीजिये कि क्या आपकी कुंडली में प्रेम विवाह के योग हैं कि नहीं ??

 

1.लग्न के स्वामी एवं सप्तम भाव के स्वामी का आपस में स्थान परिवर्तन या युति होना प्रेम विवाह का योग  बनता है । 

2.पंचम भाव एवं सप्तम भाव प्रेम विवाह में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं । यदि  पंचम भाव के स्वामी एवं सप्तम भाव के स्वामी की युति पंचम  या सप्तम भाव में होना या दोनों राशि परिवर्तन करते हों या दोनों में दृष्टि सम्बन्ध हो तो भी प्रेम - विवाह का योग बनता है।

3.गुरु और शुक्र वैवाहिक  जीवन में पति और पत्नी के कारक ग्रह हैं । इन ग्रहो पर पाप ग्रहो का प्रभावहो तो भी प्रेम विवाह का योग बनाते हैं। 

4.लग्नेश एवं  पंचमेश की युति या दृष्ट सम्बन्ध या राशि परिवर्तन प्रेम विवाह योग को उत्पन्न करता है ।

5. राहु का लग्न या सप्तम भाव में बैठना और सप्तम भाव पर गुरु का कोई प्रभाव न होना प्रेम विवाह का कारण बन सकता है । 
6.नवम भाव में धनु या मीन राशि हो और शनि या राहु की दृष्टि सातवें भाव, नवम भाव और गुरु पर हो तो प्रेम विवाह होता    है।

7.सातवें भाव में राहु ,मंगल हों। राहु ,मंगल ,सप्तमेश तीनों  वृष या तुला राशि  में हो तो प्रेम -विवाह का   योग बनता है।

8.जन्मलग्न ,सूर्यलग्न और   चन्द्रलग्न में दूसरे भाव और उसके स्वामी  का सम्बन्ध मंगल से हो तो भी प्रेम विवाह   होता है।

9.जन्म लग्न या चन्द्र लग्न में  शुक्र का पांचवे या नवें भाव में बैठना प्रेम  विवाह का  कारण बनता है ।

10.लग्न  में लग्नेश,चन्द्रमा हो तो प्रेम विवाह होता  है या सप्तम में सप्तमेश , चन्द्रमा  हो तो भी प्रेम -  विवाह हो सकता है  । 

Monday, 12 December 2016

ज्योतिष विज्ञान और रामचरित मानस के सरल उपाय

रामचरितमानस की चौपाइयों के पाठ मात्र से ही अपने जीवन में सुधार कर सकते है। और सुखमय बना सकते हैं।

सब काम बनाने के लिए-
वंदौ बाल रुप सोई रामू |
सब सिधि सुलभ जपत जोहि नामू ||

विघ्न विनाश के लिए-
सकल विघ्न व्यापहि नहि तेही |
राम सुकृपा बिलोकहि जेहि ||

रोग विनाश के लिए-
राम कृपा नाशहि सव रोगा |
जो यहि भाँति बनहि संयोगा ||

घर मे सुख लाने के लिए-
जै सकाम नर सुनहि जे गावहि |
सुख सम्पत्ति नाना विधि पावहिं ||

विद्या पाने के लिए-
गुरू गृह पढन गए रघुराई |
अल्प काल विधा सब आई ||

निर्मल बुद्धि के लिए-
ताके युग पदं कमल मनाऊँ |
जासु कृपा निर्मल मति पाऊँ ||

प्रेम बढाने के लिए-
सब नर करहिं परस्पर प्रीती |
चलत स्वधर्म कीरत श्रुति रीती ||

सुख प्रप्ति के लिए-
अनुजन संयुत भोजन करही |
देखि सकल जननी सुख भरहीं ||

बैर दूर करने के लिए-
बैर न कर काहू सन कोई |
राम प्रताप विषमता खोई ||

मेल कराने के लिए-
गरल सुधा रिपु करही मिलाई |
गोपद सिंधु अनल सितलाई ||

शत्रु नाश के लिए-
जाके सुमिरन ते रिपु नासा |
नाम शत्रुघ्न वेद प्रकाशा ||

रोजगार पाने के लिए-
विश्व भरण पोषण करि जोई |
ताकर नाम भरत अस होई ||

इच्छा पूरी करने के लिए-
राम सदा सेवक रूचि राखी |
वेद पुराण साधु सुर साखी ||

पाप विनाश के लिए-
पापी जाकर नाम सुमिरहीं |
अति अपार भव भवसागर तरहीं ||

दरिद्रता दूर के लिए-
नहि दरिद्र कोऊ दुःखी न दीना |
नहि कोऊ अबुध न लक्षण हीना |

प्रभु दर्शन पाने के लिए
अतिशय प्रीति देख रघुवीरा |
प्रकटे ह्रदय हरण भव पीरा ||

शोक दूर करने के लिए-
नयन बन्त रघुपतहिं बिलोकी |
आए जन्म फल होहिं विशोकी ||

इस ब्लॉग को सब्सक्राइब करना ना भूलें। हमारे फेसबुक पेज को भी लाइक करें। और ज्योतिष विज्ञान के लेखो का लाभ लें।🙏शुभ हो

Tuesday, 29 November 2016

कुंडली में उच्च ग्रह होने के बाद भी अच्छा फल क्यों नहीं दे रहे!?

नमस्कार मित्रो
आपकी कुंडली में ग्रह तो उच्च का बैठा हुआ है। आइये स्वयं जानिए  क्यों आपको उच्च ग्रह का उच्च फल नहीं मिल पा रहा है। इसके लिए आपके पास कंप्यूटर द्वारा बनी कुंडली होनी चाहिए। यदि नहीं है तो घबराइये मत, आपको कुंडली निर्माण के लिए किसी ज्योतिषी के पास भी नहीं जाना है। बस अपने स्मार्ट फोन सर कोई भी कुंडली एप्प डाउनलोड कर लीजिये।
हर ग्रह के अंशात्मक मान होते है, अर्थात ग्रह की किसी राशि में चाल या तय की गई दुरी। नीचे ग्रहो की उच्च व नीच स्थिति अंशात्मक मान सहित बताई गई है।

सूर्य - मेष उच्च (1-10) तुला नीच(1-10)
चंद्र - वृष उच्च(1-3) वृश्चिक नीच(1-3)
मंगल -  मकर उच्च (1-28) कर्क नीच(1-28)
बुध - कन्या उच्च (1-15)  मीन नीच(1-15)
गुरु -  कर्क उच्च (1-5)  मकर नीच(1-5)
शुक्र - मीन उच्च(1- 27) कन्या नीच (1-27)
शनि -  तुला उच्च  (1-20) मेष नीच(1-20)
कोई भी ग्रह जिस राशि में उच्च/नीच का होता है, उसी राशि से गिनने में सातवीं राशि में वो नीच/उच्च का हो जाता है। अब यदि दिये गए अंश के अंदर यदि कोई ग्रह होता है तभी वह उच्च व नीच स्थिति में होता है। यदि दिए गए अंशों से अधिक अंशों में हो,तो उस ग्रह का उच्च या नीच प्रभाव नहीं रहता है।
ऐसी स्थिति में ग्रह स्वराशि,मित्र राशि, मूल त्रिकोण राशि या शत्रु राशि में होने के बराबर फल देता है।
यदि कुंडली में उपरोक्त वर्णित स्थिति के बाद भी, आपको उचित फल नहीं मिल रहा या आपको कोई आशंका हो, तो अपने ज्योतिषी से परामर्श लें।
चूँकि ग्रह किस भाव में है, कौनसे ग्रहो के साथ है किन ग्रहों की दृष्टि गोचर कर रही है आदि, कारण भी हो सकते हैं। जिसकी जानकारी आपको ज्योतिषी के माध्यम से ही मिल सकती है।

Sunday, 14 February 2016

नमस्कार मित्रो ~ ~~ जानिए इस सप्ताह का राशिफल~~ 14th Feb - 20th Feb



मेष - गुरु की पूर्ण दृष्टि बनी हुई है ,द्वितीय चन्द्र भी अच्छे परिणाम इस सप्ताह देगा। धन व ख़ुशी अनुभव करेंगे। आलस्य भी महसूस करेंगे।  सप्ताह के मध्य में महत्वपूर्ण काम संपन्न होगा।

वृष - आप लम्बे समय से  जिसकी प्रतीक्षा कर रहे थे  वो इस सप्ताह पूरी होने वाली है। उत्साहित रहेंगे।  प्रेमी से मुलाक़ात होगी।  पत्नी से सम्बन्ध मधुर होगे। 

मिथुन - समय थोड़ा प्रतिकूल बन रहा है।  आपको  ज़रूरत है की सयम से काम ले।  चिंताए बढ़ सकती है व्यर्थ में ऊर्जा न बहाएं।  इन्वेस्टमेंट करने में सतर्कता रखे। 

कर्क -  इस सप्ताह आपके लिए विशेष होने जा रहा है।  किसी खास व्यक्ति से मुलाक़ात करेंगे।  धन और विवाद को लेकर धैर्य रखे।  बना हुआ काम बिगड़ सकता है।

सिंह - समय नियंत्रण में है , आप अपने मुताबिक कार्य कर पा रहे है।  धन की वृद्धि होगी। सामाजिक कार्य में हिस्सा लगे और प्रोत्साहन प्राप्त करेंगे। 

कन्या -  चिंताओं से मुक्त होगे।  सप्ताह के मध्य से उत्साह प्राप्त होगा।  धार्मिक और आध्यात्म में  रूचि लेंगे। व्यापर के समझोते पूर्ण होगे। 

तुला -  समय अच्छा है लाभ देगा।  प्रेमियों के लिए ये सप्ताह बेचैनी वाला रहेगा। व्यर्थ के खर्चे करेंगे। वाहन आदि में पैसा लगायेगे।

वृश्चिक - जल्दबाजी में कोई जोखिम न लें।  अभी भी आपको ध्यान से धैर्य से काम लेने की आवश्यकता है।  व्यर्थ की चिंताओं को छोड़ अपने उद्देश्यों पर ध्यान केंद्रित करें।  प्रेम में निराशा प्राप्त हो सकती है। 

धनु - हार न माने , निराश ना हो।  स्थितियां अभी भी नियंत्रण में।  अनुभवी लोगो से सलाह लें और आगे बढ़ें। 

मकर - शनि की दृष्टि तो पहले से प्राप्त हो रही है , अब गोचर चन्द्र की दृष्टि  भी प्राप्त होगी जिससे धन का आगमन अच्छा बना रहेगा। पत्नी के साथ कही बहार जा सकते हैं।

कुम्भ - सूर्य राशि में गोचर कर रहा है।  तनाव बढ़ेगा, यात्रा व दबाओं पर खर्च करेंगे।  घर के बढे पुरुष का स्वस्थ का ध्यान रखे।  सप्ताह में अच्छी खबर भी मिलेगी।  विवाह सम्बन्ध हो सकता है।  

मीन - चन्द्र का गोचर लाभदायक रहेगा।  ख़ुशी अनुभव करेंगे।  मित्रों के साथ कही यात्रा या कार्यक्रम में भाग लेंगे।  जीवनसाथी को मनाने में सफल होगे।

अगर आप निःशुल्क ज्योतिष सलाह चाहते है . . तो इस पेज को लाइक करे . .
आप सीधे मुझसे कार्यालय आ कर मिल सकते हैं, समय : 12pm से 05pm बजे तक
संपर्क करें - +91-8109555489