Saturday, 3 October 2015

तिल - प्रकरण

==तिल - प्रकरण ==
मानव शरीर पर काले रंग के छोटे - छोटे बिंदु पाये जाते हैं। ये आकार में तिलहन के बीज के सामान होने के कारण, इन्हे भी 'तिल' ही कहा जाता है। सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार, वर्ण, आकार ,स्थान के आधार पर इन तिल का मानव जीवन पर प्रभाव पड़ता है।
चिकित्सा विज्ञान के मतानुसार रक्त में या अन्य किसी दूषित प्रभाव से भी तिल , फुंसी दाने आदि उत्पन्न होते हैं। चिकित्सा विज्ञान का यह तथ्य भी बहुत तर्क सांगत लगता है।
परन्तु ज्योतिषीय मत को भी नकारा नहीं जा सकता। हमारे पूर्वज , हृषिमुनियों के गहन विवेचन ,शोध का जो निष्कर्ष है वह ग्रंथो में विस्तार से वर्णित है।
यहां मैं आपको संक्षेप में कुछ विशेष प्राकृतिक (या जन्म से ) तिलों की स्थिति और उनका मानव जीवन पर प्रभाव-परिणाम पर बता रहा हूँ।
- सिर के दाहिने भाग में पाया जाने वाला तिल व्यक्ति को समाज में सम्मान दिलाता है। 
- बांये भाग में पाया जाने वाला तिल व्यक्ति को समस्याकारी व अशुभ माना गया है। 
- कंठ भाग पर स्थित तिल व्यक्ति को बुद्धिमान, स्वावलम्बी और धनार्जन में सफल बनाता है। 
- ठोड़ी पर स्थित तिल वाला व्यक्ति स्वार्थी , अपने हित देखने वाला होता है। 
- दायें कपोल पर स्थित तिल उन्नतिशील और मेघावी होने की सूचना देता है।
- वायें कपोल पर स्थित तिल अशुभ माना गया है। ऐसे व्यक्ति को धन का अभाव रहता।
- भौंह के पास, दाहिनी ओर तिल नेत्र रोग होने के संकेत देता है।
- नीचे के होठ पर स्थित तिल निर्धनता का सूचक है।
- ऊपरी होठ पर स्थित तिल विलासिता ,रोमांस का सूचक होता है।
- नासिका के दायें भाग में स्थित तिल सुख, धन-संपन्न होने की सोचना देता है।
- नासिका के दायें भाग में स्थित तिल ,कठोर परिश्रम के बाद सफलता मिलने का सूचक होता है।
सभी को नमस्कार।

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